दि. 11 अगस्त 2026
🎙️ MEDIA VNI | विशेष रिपोर्टजपतलाई आश्रमशाला में जहरीले सांप का कहर! 3 छात्राओं की मौत, 2 की हालत गंभीर; आश्रमशालाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल.?
मीडिया वी.एन.आय :
गड़चिरौली : गड़चिरौली जिले के धानोरा तालुका स्थित जपतलाई की अनुदानित आदिवासी आश्रमशाला में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
बताया जा रहा है कि जागतिक आदिवासी दिन 9 अगस्त रविवार के देर रात आश्रमशाला के छात्रावास में छात्राएं सो रही थीं। इसी दौरान एक जहरीला सांप छात्रावास में घुस आया और 5 छात्राओं को सांप ने डस लिया।
इस दर्दनाक हादसे में 3 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 2 छात्राओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।
गंभीर छात्राओं को बेहतर उपचार के लिए नागपुर ले जाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
यह घटना जितनी दुखद है, उतने ही गंभीर सवाल भी अपने पीछे छोड़ गई है।
क्या आदिवासी आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं?
क्या छात्रावासों में जहरीले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी?
और अगर ऐसी आपात स्थिति सामने आती है, तो विद्यार्थियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की तैयारी कितनी मजबूत है?
घटना के बाद पीड़ित परिवारों और आश्रमशाला का दौरा करते हुए आदिवासी अपर आयुक्त आयुषी सिंह, विधायक मिलिंद नरोटे और पूर्व सांसद अशोक नेते के सामने आजाद समाज पार्टी तथा ग्रामवासियों की ओर से विभिन्न मांगें रखी गईं।
सबसे प्रमुख मांग है कि मृत छात्राओं के परिवारों को प्रत्येक 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल दी जाए।
इसके साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच में यदि किसी संस्था संचालक, अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित संस्था की मान्यता रद्द करने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा संबंधित दोषी कर्मचारी, अधिकारी तथा आश्रमशाला के संस्थापक या संचालक के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज करने की मांग उठाई गई है।
एक और महत्वपूर्ण मांग है कि महाराष्ट्र की सभी आदिवासी आश्रमशालाओं का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
इस ऑडिट में आश्रमशालाओं की भौतिक सुविधाएं, छात्रावासों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच की जाए।
वहीं, धानोरा से जपतलाई जाने वाला खराब रास्ता भी इस मामले में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर सामने आया है। दावा किया गया है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आपातकालीन परिस्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हुई।
इसीलिए इस सड़क की तत्काल मरम्मत कर प्रत्यक्ष रूप से काम शुरू करने की मांग भी प्रशासन से की गई है।
तीन मासूम छात्राओं की जान चली गई है। उनके परिवारों का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
अगर यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था, तो भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
और यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
आदिवासी विद्यार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा प्राप्त करना उनका अधिकार है।
इसलिए जपतलाई की घटना को केवल एक हादला मानकर भूलना नहीं, बल्कि इससे सबक लेते हुए राज्य की सभी आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
मासूमों की मौत का जवाब कौन देगा?
आश्रमशालाओं में सुरक्षा कब मजबूत होगी?
और जिम्मेदारी तय करने के लिए सरकार अब क्या कदम उठाएगी?
इन सवालों के जवाब का इंतजार अब पीड़ित परिवारों, ग्रामवासियों और पूरे आदिवासी समाज को है।
इस मामले की हर महत्वपूर्ण अपडेट पर MEDIA VNI की नजर बनी हुई है।
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